Relief Pacakge – A New Perspective

I got this piece in my WhatsApp feed and found it to be providing a new perspective.Therefore I decided to share it with due credit to its anonymous author.

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राहत पैकेज को ऐसे समझे

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# एक बार 10 मित्र ढाबे पे खाना खाने गए ।

बिल आया 100 रु । 10 रु की थाली थी ।

मालिक ने तय किया कि बिल की वसूली देश की कर प्रणाली के अनुरूप ही होगी

     पहले 4 (गरीब बेचारे ) उनका बिल माफ़

     5वाँ …………….1रु

     6ठा …………….3रु

     7वाँ …………….7रु

     8वाँ …………….12रु

     9वाँ …………….18रु

     10वाँ …………. 59रु देने लगा ।

साल भर बाद मालिक बोला । आप लोग मेरे इतने अच्छे ग्राहक हैं सो मैं आप लोगों को बिल में 20 रु की छूट दे रहा हूँ । अब समस्या ये कि इस छूट का लाभ कैसे दिया जाए सबको । पहले चार तो यूँ भी मुफ़्त में ही खा पी रहे थे । एक तरीका ये था की 20 रु बाकी 6 में बराबर बाँट दें । ऐसी स्थिति में पहले 4 के साथ 5वां भी फ्री हो जाते और 5वां ₹2.33 और 6ठा ₹0.67 घर ले जा सकते थे।

पर ढाबे-मालिक ने ज़्यादा न्याय संगत तरीका खोजा ।

नयी व्यवस्था में अब पहले 5 मुफ़्त खाने लगे

•6ठा 3 की जगह 2 रु देने लगा      … 33%लाभ

•7वां 7 के 5 रु देने लगा            …28%लाभ

•8वां 12 की जगह 9 रु देने लगा       …25%लाभ

•9वां 18 की जगह 14₹ देने लगा       …22%लाभ

•10वां 59 की जगह49₹ देने लगा ..सिर्फ16%लाभ

बाहर आकर 6ठा बोला , मुझे तो सिर्फ 1 रु का लाभ मिला जबकि वो पूंजीपति 10 रु का लाभ ले गया ।

5वां जो आज मुफ़्त में खा के आया था, बोला वो मुझसे 10 गुना ज़्यादा लाभ ले गया ।

7वां बोला , मुझे सिर्फ 2 रु का लाभ और ये उद्योगपति 10 रु ले गया ।

पहले 4 बोले …..अबे तुमको तो फिर भी कुछ मिला हम गरीबों को तो इस छूट का कोई लाभ ही नहीं मिला ।

ये सरकार सिर्फ इस पूंजीपति उद्योगपति सेठ के लिए काम करती है ..मारो ..पीटो ..फूंक दो……..और सबने मिल के दसवें को पीट दिया ।

सेठ जी(10 वां) पिटपिटा के इलाज करवाने सिंगापुर, आस्ट्रेलिया चला गया।

अगले दिन वो न उस ढाबे में खाना खाने नहीं आया  और न ही लौटकर भारत।

और जो 9 थे उनके पास सिर्फ 40 रु थे जबकि बिल 80 रु का था ।

मित्रों अगर हम लोग उस बेचारे को यूँ ही पीटेंगे तो हो सकता है वो किसी और ढाबे पर खाना खाने लगे (दूसरे देश/राज्य में चला जाए) जहां उसे tax/राहत पैकेज प्रणाली हमसे बेहतर मिल जाए ।

मित्रों …..ये है कहानी हमारे taxation system की और budget, राहत पैकेज की …….

उद्योगपतियों और पूंजीपतियों and Taxpayers को चाहे जितनी गाली दीजिये पर कहानी यही है ।

धन्यवाद !